
गोपेश्वर। जिले में लोक निर्माण विभाग की 178 सड़कों में से 90 सड़कें बदहाल स्थिति में हैं। लोनिवि के अंतर्गत जिले में करीब 24 पैदल मार्गों की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। वहीं, जिले में बदरीनाथ हाईवे सहित सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों का जिम्मा संभाले बीआरओ की सुस्ती के चलते हाईवे विस्तारीकरण और सीमा पर बनने वाली सड़कों के निर्माण की गति भी धीमी है।
लोनिवि की ये सड़कें हैं बदहाल
गोपेश्वर-पोखरी मोटर मार्ग, कुरुड-मांणखी, घाट-थराली, नंदप्रयाग-घाट, कोठियाल सैंण-सैकोट, बिरही-निजमुला मोटर मार्ग, लीसा फैक्ट्री बाई पास (गोपेश्वर), हेलंग-उर्गम मोटर मार्ग आदि।
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लोनिवि की सड़कें बनी हैं खतरनाक
रुद्रप्रयाग। जिले में लोक निर्माण विभाग के पांच डिवीजनों के जिम्मे 111 सड़कें हैं। इसके साथ ही लगभग एक दर्जन नई सड़कों का निर्माण होना है। पांच-छह सड़कों का डेढ़ लेन में चौड़ीकरण होना है। लोनिवि के काम की रफ्तार ऐसी है कि गुप्तकाशी-कालीमठ मोटर मार्ग को खोलने में ही पांच माह लग गए। जबकि बीआरओ ने 76 किलोमीटर लंबे केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग को ढाई माह में खोल दिया था। इसकी वजह संसाधन, इंजीनियर और मजदूर रहे। लोनिवि हमेशा इंजीनियरों की कमी से जूझता रहा है।
लोक निर्माण विभाग का हाल यह हैं कि यदि कोई मार्ग बंद हो जाए, तो उसे खोलने में विभाग को कई दिन लग जाते हैं। जेसीबी भी ठेकेदार की कृपा से मिल पाती है। आपदा के दौरान लगभग 78 सड़कें अवरुद्ध हुई थी। आज यह सड़कें तो खुल तो चुकी हैं लेकिन अधिकांश में सफर जोखिम भरा बना हुआ है। बीआरओ की बात करें तो संवेदनशील स्थानों पर बीआरओ के मजदूर डोजर और जेसीबी के साथ हर समय मौजूद रहते हैं। यदि बीआरओ की सड़क लोनिवि को हस्तांतरित हो गई तो लोनिवि लोगों को कितना राहत पहुंचा पाएगी, यह सवाल उठ रहा है।
